पढ़ना सिखाना स्कूल का काम है। स्कूल से पहले आप घर पर कुछ और दे सकते हैं: कहानियों से प्यार, आवाज़ों को सुनने वाले कान, और ढेर सारी बातचीत। यह लेख बताता है कि शोध क्या दिखाता है, और देवनागरी के हिसाब से कुछ ऐसे खेल सुझाता है, जिनके लिए कुछ भी नहीं चाहिए।
शोध क्या दिखाता है?
2008 में अमेरिका के National Early Literacy Panel ने सैकड़ों अध्ययनों की समीक्षा की। उसे छह शुरुआती कौशल मिले, जिनका आगे के पढ़ने-लिखने से मध्यम से मज़बूत संबंध है, परिवार की पृष्ठभूमि को ध्यान में रखने के बाद भी:
- अक्षरों को पहचानना (उनके नाम और आवाज़ें);
- आवाज़ों की समझ: बोली की आवाज़ों पर ध्यान देना और उनसे खेलना;
- अक्षरों और अंकों के नाम जल्दी बोलना;
- चीज़ों और रंगों के नाम जल्दी बोलना;
- लिखना, जैसे अपना नाम लिखना;
- आवाज़ों की याददाश्त: आवाज़ों की एक लड़ी को थोड़ी देर याद रखना।
रिपोर्ट यह भी कहती है कि बोली जाने वाली भाषा जितनी समृद्ध हो – वाक्य बनाना, शब्द समझाना, सुनी बात समझना – उसकी भी बड़ी भूमिका है।
अमेरिकन एकेडमी ऑफ़ पीडियाट्रिक्स (AAP) छुटपन से ही साथ में ज़ोर से पढ़ने की सलाह देती है, क्योंकि इससे माता-पिता और बच्चे का रिश्ता मज़बूत होता है और बच्चे के आसपास भरपूर भाषा रहती है।
देवनागरी में अक्षर क्यों अलग है
अंग्रेज़ी में बच्चा अलग-अलग आवाज़ों (k-a) से शब्द जोड़ता है। हिंदी में लिखने की इकाई अक्षर है: एक व्यंजन अपनी मात्रा के साथ – क, का, कि, की, कु, कू। इसलिए हिंदी में पढ़ने की तैयारी का सबसे आसान रास्ता अक्षरों से होकर जाता है: शब्द को अक्षरों में तोड़ना (क-म-ल), और यह सुनना कि मात्रा बदलने पर आवाज़ कैसे बदलती है (कल, काल, कील)। अलग-अलग ध्वनियों की बारीक समझ बाद में, पढ़ना सीखते-सीखते आती है।
आवाज़ों, अक्षरों और तुकबंदी के खेल
- ताली से अक्षर गिनना। शब्दों को तालियों में बोलें: Te-ki, क-म-ल, ति-त-ली, हा-थी। किस शब्द में सबसे ज़्यादा तालियाँ हैं?
- तुकबंदी ढूँढना। “बिल्ली के साथ क्या तुक मिलता है?” दिल्ली, किल्ली, और बनाए हुए शब्द भी चलेंगे। “मछली जल की रानी है” जैसी बाल कविताएँ गाते हुए आख़िरी शब्द बच्चे को पूरा करने दें।
- पहला अक्षर। “मुझे एक चीज़ दिख रही है, जो ‘म’ से शुरू होती है।” मम्मी, मटका, मोर।
- मात्रा का खेल। एक व्यंजन चुनें और उसकी मात्राएँ गाएँ: क, का, कि, की… फिर पूछें: “काला में कौन-सी आवाज़ है, क या का?”
- शब्दों की अंताक्षरी। अगला शब्द पिछले शब्द के आख़िरी अक्षर से शुरू होता है: कमल – लड्डू – डमरू।
- अपना नाम। दुकान के बोर्ड, अख़बार या डिब्बों पर बच्चे के नाम का पहला अक्षर ढूँढें।
कहानियाँ जो बातचीत बन जाती हैं
कहानी को एक साँस में पढ़ना ज़रूरी नहीं: उस पर बात की जा सकती है।
- किसी तस्वीर पर रुकें: “तुम्हें क्या लगता है, अब क्या हो रहा है?”
- कोई नया शब्द चुनें और साथ में उसका मतलब समझें।
- आख़िर में बच्चे को कहानी फिर से सुनाने दें, या नया अंत बनाने दें।
इस तरह एक कहानी नए शब्द, ध्यान और साथ का समय, सब एक साथ लाती है। दादी-नानी की सुनाई कहानियाँ भी उतनी ही काम की हैं, जितनी किताब वाली।
ध्यान रखें
छोटे, ख़ुशी भरे पल, पढ़ाई की कक्षा नहीं। अगर बच्चे का मन न हो, तो रुक जाएँ और किसी और दिन फिर कोशिश करें।
Teki के कहानियों के किनारे पर बोलने और कहानियों के खेल हैं, और बहुत-से खेलों के लिए बस आप दोनों और एक दरी चाहिए। Teki कैसे काम करता है





